Saturday, May 12, 2012

छोटे छोटे पंछी


शहर के बीचों बीच
इन बड़ी बड़ी इमारतों
में रहते हैं
छोटे छोटे पंछी
झांकते हैं दरीचों से
छुप जाते है उड़ जाते है
हमारे दुनिया के दरिचों मे
अपनी दुनिया बासाते है
छोटे छोटे पंछी
शहर के बीचों बीच
इन  बड़ी बड़ी इमारतों
में रहते हैं
छोटे छोटे पंछी

क्या सोचते होंगे कभी
की इन इमारतों मे
इस शाहर मे
उनकी क्या जगह है?
इस दुनिया ने उनको
इन छोटे छोटे दरिचों के
सिवा क्या दिया है?
पता नही
लगते तो है
बड़े बेफिक्र पंछी
शहर के बीचों बीच
इन बड़ी बड़ी इमारतों
में रहते हैं
छोटे छोटे पंछी

उड़ा देते है, तोड़ देते है
खोंसले इनके रोज़
इमारतों मे रहने वाले लोग
कुछ घर उजाड़कर
घर अपना बासाते है
इमारतों मे रहने वाले लोग
इस अधिकार प्रतिकार  
की आग से अछूते है
ये छोटे छोटे पंछी
शहर के बीचों बीच
इन बड़ी बड़ी इमारतों
में रहते हैं
छोटे छोटे पंछी


खाते है गाते है
बनाते है घर
बड़े करते है बच्चे
उनको उड़ा देते है
सो जाते है
मरने पर भी
शोर ना मचाते है
सोचता हूँ तो लगता है
तस्सवुर की क़ैद से
आज़ाद है
आसमान मे उड़ते
ये छोटे छोटे पंछी
शहर के बीचों बीच
इन बड़ी बड़ी इमारतों
में रहते हैं
छोटे छोटे पंछी

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